Monday, 28 March 2016
Sunday, 27 March 2016
about cricket star sir don Bradman in hindi
ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर सर डॉन ब्रैडमैन टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के सबसे महान बल्लेबाज रहे हैं। टेस्ट में उनका बल्लेबाजी औसत 99.94 का रहा है जो आजकल के क्रिकेटरों के लिए एक सपने जैसा है। आइए हम आपको बताते हैं इस महान बल्लेबाज से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
ये भी देखें
क्रिकेट स्कोरकार्ड
# सर डॉन ब्रैडमैन का जन्म 27 अगस्त 1908 को सिडनी के एक नर्सिंग होम में हुआ था।
# ब्रैडमैन ने 20 साल की उम्र इंग्लैंड के खिलाफ 1928 में ब्रिसबेन में अपने इंटरनेशनल करियर की शुरूआत करी थी। उन्होंने पहली पारी में 18 औऱ दूसरी पारी में केवल 1 रन बनाया था।
# फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ब्रैडमैन का सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर नाबाद 452 रन है। जो उन्होंने 1930 में सिडनी क्रिकेक ग्राउंड में क्वीसलैंड की टीम के खिलाफ बनाए थे। ब्रैडमैन ने न्यू साउथ वेल्स की तरफ से खेलते हुए यह कारनामा किया था।
# 1930 का इंग्लैंड दौरा ब्रैडमैन के लिए कई मायनों में खास था।
इस दौरे में वॉर्सेस्टर की टीम के खिलाफ हुए मुकाबले में ब्रैडमैन ने 236 रन बनाए थे। इसके साथ वह इंग्लैंड में दोहरा शतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए थे ।
इस दौरे पर ब्रैडमैन ने 6 दोहरे शतक, 10 शतक और 15 अर्धशतक जड़े थे।
टेस्ट मैच में ब्रैडमैन जो रन बनाए वो इस प्रकार थे 8, 131, 254, 1, 334, 14 और 232। इस पूरी सीरीज में ब्रैडमैन ने 139.14 की बेहतरीन औसत से 974 रन बनाए थे।
इस पूरे इंग्लैंड दौरे पर ब्रैडमैन ने 98.66 की औसत से करीब 3000 रन बनाए थे।
# अपने पूरे करियर में ब्रैडमैन ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ केवल एक सीरीज ही खेली थी। इस सीरीज में उन्होंने 201.50 की अविश्वसनीय औसत से 806 रन बनाए थे।
# 1932-33 की सीरीज में इंग्लैंड ने ब्रैडमैन की रनों की रफ्तार रोकने के लिए एक नई नीति का इस्तेमाल किया था। जिसे उसने बॉडीलाइन का नाम दिया था। इसे लेकर इंग्लैंड को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
# ब्रैडमैन ने 30 अप्रैल 1932 को सिडनी के सेंट पॉल बरवुड में जेसी मेन्ज़ीस से विवाह किया था।
# 1934 के इंग्लैंड दौरे के अंत में अप्पेंडिसिटिस के चलते डॉन ब्रैडमैन गंभार रूप से बीमार हो गए थे। जिसके बाद अखबारों ने उन्हें श्रृध्दांजली देने की तैयारी कल थी।
# ब्रैडमैन ने अपने पूरे करियर में कुल 52 टेस्ट मैच खेले थे जिसमें उन्होंने 99.94 की औसत से 6996 रन बनाए थे। उन्होंने यह रन 80 पारियों में बनाए थे जिसमें 10 बार वह नॉटआउट रहे थे। इसमें 29 शतक औऱ 13 अर्धशतक शामिल थे।
# अपने पूरे करियर के दौरान अपनी टीम के कुल रनों के 26 प्रतिशत रन डॉन ब्रैडमैन ने बनाए थे।
# फर्स्ट क्लास करियर
अपने फर्स्ट क्लास करियर में ब्रैडमैन ने 95.14 की औसत से 28067 रन बनाए थे।
उन्होंने 27 बार 20 या उससे अधिकर रन बनाए थे।
ब्रैडमैन ने 295 पारियों में 117 शतक मारे थे।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में खेली अपनी 295 पारियों में डॉन ब्रैडमैन 16 बार शून्य पर आउट हुए थे।
ब्रैडमैन ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में गेंदबाजी करते हुए 2114 गेंदें फेंकी थी। उन्होंने 37.97 की औसत से 36 विकेट भी लिए थे।
# ऑस्ट्रेलिया के हर शहर में ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपरेशन का पोस्ट बॉक्स नंबर 9994 है। जो टेस्ट मैचों में सर डॉन ब्रैडमैन का बल्लेबाजी औसत है। कहा जाता है कि एबीसी की जर्नल मैनेजर रहे चार्ल्स मूसा उनके दोस्त थे और ब्रैडमैन के सम्मान में उन्होंने ऐसा किया था।
# अपने पूरे टेस्ट करियर के दौरान डॉन ब्रैडमैन कभी भी नर्वस नाइंटी का शिकार नहीं हुए थे।
# टेस्ट मैचों के पहली पारी में ब्रैडमैन का औसत 97.85 था जबकि दूसरी पारी में 104.50 था।
# ब्रैडमैन ने 24 टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी करी थी। इसमें से 15 मैचों में टीम को जीत हासिल हुई थी जबकि 3 मैच में हार का सामना करना पड़ा था। 6 मैच ड्रॉ पर समाप्त हुए थे। कप्तान के तौर पर खेलते हुए उनका बल्लेबाजी औसतक 101.51 था जबकि एक खिलाड़ी के तौर पर 98.69। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कप्तान के तौर पर उनकी बल्लेबाजी औसत 98.78 थी जबकि एक खिलाड़ी के तौर पर 91.57।
# 1931 में डॉन ब्रैडमैन को विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया था।
# 25 फरवरी 2001 को 92 साल की उम्र में डॉन ब्रैडमैन का निधन एडिलेड स्थित उनके घर में हुआ था।
# डॉन ब्रैडमैन केवल ऑस्ट्रेलिया के नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मशहूर स्पोर्ट्स आइकन थे। साउथ अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला जब 27 साल जेल मे रहने के बाद बाहर आए थे तो उन्होंने एक ऑस्ट्रेलियन पर्यटक से पहला सवाल पूछा था कि सर डोनाल्ड ब्रैडमैन अभी भी जीवित है?
# टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लाला अमरनाथ अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने डॉन ब्रैडमैन को हिट विकेट आउट किया था।
ये भी देखें
क्रिकेट स्कोरकार्ड
# सर डॉन ब्रैडमैन का जन्म 27 अगस्त 1908 को सिडनी के एक नर्सिंग होम में हुआ था।
# ब्रैडमैन ने 20 साल की उम्र इंग्लैंड के खिलाफ 1928 में ब्रिसबेन में अपने इंटरनेशनल करियर की शुरूआत करी थी। उन्होंने पहली पारी में 18 औऱ दूसरी पारी में केवल 1 रन बनाया था।
# फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ब्रैडमैन का सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर नाबाद 452 रन है। जो उन्होंने 1930 में सिडनी क्रिकेक ग्राउंड में क्वीसलैंड की टीम के खिलाफ बनाए थे। ब्रैडमैन ने न्यू साउथ वेल्स की तरफ से खेलते हुए यह कारनामा किया था।
# 1930 का इंग्लैंड दौरा ब्रैडमैन के लिए कई मायनों में खास था।
इस दौरे में वॉर्सेस्टर की टीम के खिलाफ हुए मुकाबले में ब्रैडमैन ने 236 रन बनाए थे। इसके साथ वह इंग्लैंड में दोहरा शतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए थे ।
इस दौरे पर ब्रैडमैन ने 6 दोहरे शतक, 10 शतक और 15 अर्धशतक जड़े थे।
टेस्ट मैच में ब्रैडमैन जो रन बनाए वो इस प्रकार थे 8, 131, 254, 1, 334, 14 और 232। इस पूरी सीरीज में ब्रैडमैन ने 139.14 की बेहतरीन औसत से 974 रन बनाए थे।
इस पूरे इंग्लैंड दौरे पर ब्रैडमैन ने 98.66 की औसत से करीब 3000 रन बनाए थे।
# अपने पूरे करियर में ब्रैडमैन ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ केवल एक सीरीज ही खेली थी। इस सीरीज में उन्होंने 201.50 की अविश्वसनीय औसत से 806 रन बनाए थे।
# 1932-33 की सीरीज में इंग्लैंड ने ब्रैडमैन की रनों की रफ्तार रोकने के लिए एक नई नीति का इस्तेमाल किया था। जिसे उसने बॉडीलाइन का नाम दिया था। इसे लेकर इंग्लैंड को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
# ब्रैडमैन ने 30 अप्रैल 1932 को सिडनी के सेंट पॉल बरवुड में जेसी मेन्ज़ीस से विवाह किया था।
# 1934 के इंग्लैंड दौरे के अंत में अप्पेंडिसिटिस के चलते डॉन ब्रैडमैन गंभार रूप से बीमार हो गए थे। जिसके बाद अखबारों ने उन्हें श्रृध्दांजली देने की तैयारी कल थी।
# ब्रैडमैन ने अपने पूरे करियर में कुल 52 टेस्ट मैच खेले थे जिसमें उन्होंने 99.94 की औसत से 6996 रन बनाए थे। उन्होंने यह रन 80 पारियों में बनाए थे जिसमें 10 बार वह नॉटआउट रहे थे। इसमें 29 शतक औऱ 13 अर्धशतक शामिल थे।
# अपने पूरे करियर के दौरान अपनी टीम के कुल रनों के 26 प्रतिशत रन डॉन ब्रैडमैन ने बनाए थे।
# फर्स्ट क्लास करियर
अपने फर्स्ट क्लास करियर में ब्रैडमैन ने 95.14 की औसत से 28067 रन बनाए थे।
उन्होंने 27 बार 20 या उससे अधिकर रन बनाए थे।
ब्रैडमैन ने 295 पारियों में 117 शतक मारे थे।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में खेली अपनी 295 पारियों में डॉन ब्रैडमैन 16 बार शून्य पर आउट हुए थे।
ब्रैडमैन ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में गेंदबाजी करते हुए 2114 गेंदें फेंकी थी। उन्होंने 37.97 की औसत से 36 विकेट भी लिए थे।
# ऑस्ट्रेलिया के हर शहर में ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपरेशन का पोस्ट बॉक्स नंबर 9994 है। जो टेस्ट मैचों में सर डॉन ब्रैडमैन का बल्लेबाजी औसत है। कहा जाता है कि एबीसी की जर्नल मैनेजर रहे चार्ल्स मूसा उनके दोस्त थे और ब्रैडमैन के सम्मान में उन्होंने ऐसा किया था।
# अपने पूरे टेस्ट करियर के दौरान डॉन ब्रैडमैन कभी भी नर्वस नाइंटी का शिकार नहीं हुए थे।
# टेस्ट मैचों के पहली पारी में ब्रैडमैन का औसत 97.85 था जबकि दूसरी पारी में 104.50 था।
# ब्रैडमैन ने 24 टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी करी थी। इसमें से 15 मैचों में टीम को जीत हासिल हुई थी जबकि 3 मैच में हार का सामना करना पड़ा था। 6 मैच ड्रॉ पर समाप्त हुए थे। कप्तान के तौर पर खेलते हुए उनका बल्लेबाजी औसतक 101.51 था जबकि एक खिलाड़ी के तौर पर 98.69। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कप्तान के तौर पर उनकी बल्लेबाजी औसत 98.78 थी जबकि एक खिलाड़ी के तौर पर 91.57।
# 1931 में डॉन ब्रैडमैन को विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया था।
# 25 फरवरी 2001 को 92 साल की उम्र में डॉन ब्रैडमैन का निधन एडिलेड स्थित उनके घर में हुआ था।
# डॉन ब्रैडमैन केवल ऑस्ट्रेलिया के नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मशहूर स्पोर्ट्स आइकन थे। साउथ अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला जब 27 साल जेल मे रहने के बाद बाहर आए थे तो उन्होंने एक ऑस्ट्रेलियन पर्यटक से पहला सवाल पूछा था कि सर डोनाल्ड ब्रैडमैन अभी भी जीवित है?
# टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लाला अमरनाथ अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने डॉन ब्रैडमैन को हिट विकेट आउट किया था।
about virat kholi in hindi
पूरा नाम – विराट प्रेम कोहली
जन्म – 5 नवम्बर 1988
जन्मस्थान -दिल्ली
पिता – प्रेम कोहली
माता – सरोज कोहली
विराट कोहली की जीवनी / Virat Kohli Biography In Hindi
विराट कोहली का जन्म 5 नवम्बर 1988 को दिल्ली में एक पंजाबी परिवार में हुआ था. उसके पिता प्रेम कोहली एक अपराधिक वकील और माता सरोज कोहली एक गृहिणी है. उन्हें एक बड़ा भाई विकाश और एक बड़ी बहन भावना भी है. उनके परिवार के अनुसार जब कोहली 3 साल के थे तभी उन्होंने क्रिकेट बैट हात में ली थी, और अपने पिता को बोलिंग करने कहा था.
कोहली उत्तम नगर में बड़े हुए और विशाल भारती पब्लिक स्कूल से शिक्षा ग्रहण की. 1998 में, पश्चिमी दिल्ली क्रिकेट अकादमी बनी और कोहली 9 साल की आयतु में ही उसमे शामिल हुए. कोहली के पिता ने तभी कोहली को अकादमी में शामिल किया जब उनके पडोसी ने उनसे कहा की, “विराट को गल्ली क्रिकेट में समय व्यर्थ नही करना चाहिये बल्कि उसे किसी अकादमी में व्यावसायिक रूप से क्रिकेट सीखना चाहिये.” राजीवकुमार शर्मा के हातो कोहली ने प्रशिक्षण लिया और सुमित डोगरा अकादमी में मैच भी खेला. 9 वी कक्षा में उन्हें सविएर कान्वेंट में डाला गया ताकि उन्हें क्रिकेट प्रशिक्षण में मदद मिल सके. खेलो के साथ ही कोहली पढाई में भी अच्छे थे, उनके शिक्षक उन्हें, “एक होनहार और बुद्धिमान बच्चा बताते है.”
18 दिसम्बर 2006 को ब्रेन स्ट्रोक की वजह से काफी दिनों तक आराम करने के बाद उनके पिता की मृत्यु हो गयी. अपने प्रारंभिक जीवन को याद करते हुए कोहली एक साक्षात्कार में बताते है की, “मैंने अपने जीवन में बहोत कुछ देखा. मैंने युवा दिनों में ही अपने पिता को खो दिया, जिससे पारिवारिक व्यापार भी डगमगा गया था, इस वजह से मुझे किराये की रूम में भी रहना पड़ा. ये समय मेरे और मेरे परिवार के लिए काफी मुश्किल था… आज भी उस समय को याद करते हुए मेरी आँखे नम हो जाती है.” कोहली के अनुसार, बचपन से ही क्रिकेट प्रशिक्षण में उनके पिता ने उनकी सहायता की थी. “मेरे पिता ही मेरे लिए सबसे बड़ा सहारा थे.” वही थे जो रोज़ मेरे साथ खेलते थे. आज भी कभी-कभी मुझे उनकी कमी महसुस होती है..
विराट कोहली क्रिकेट करियर / Virat Kohli Cricket Career :-
विराट कोहली एक अंतर्राष्ट्रीय भारतीय क्रिकेटर है. वे दाये-हात के बल्लेबाज है और कभी-कभी दाये-हात से बोलिंग भी कर लेते है. वे अभी टेस्ट क्रिकेट की भारतीय टीम के कप्तान और वन-डे क्रिकेट की भारतीय टीम के उप-कप्तान है. इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में वे रॉयल चैलेंजर बंगलौर के कप्तान है.
उन्होंने घरेलु क्रिकेट में विविध-उम्र की टीम में दिल्ली का प्रतिनिधित्व भी किया है. वे अंडर-19 टीम में भारत के कप्तान थे जिसने 2008 में मलेशिया के अंडर-19 विश्वकप में इतिहास रचा था. इसके कुछ महीनो बाद ही उन्होंने श्रीलंका के विरुद्ध अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुवात की थी. शुरू-शुरू में उन्हें टीम में आरक्षित खिलाडी के रूप में रखा जाता था, लेकिन जल्द ही वन-डे क्रिकेट में मध्यक्रम में उन्होंने अपने आप को साबित किया. 2011 में विश्वकप जितने वाली भारतीय टीम में से एक विराट कोहली थे. कोहली ने 2011 में वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ किंग्स्टन में अपना पहला टेस्ट मैच खेला. 2013 से ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका में अपने शतको के कारण उन्हें “वन-डे स्पेशलिस्ट” के नाम से जाना जाता है. इसी साल वे ICC की वन-डे रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर भी पहोचे. उस समय अपने करियर में वे पहली कार वन-डे बैट्समैन की लिस्ट में पहले स्थान पर पहोचे थे. बाद में उन्हें 20-20 प्रारूप में भी सफलता मिली, वे ICC की सर्वश्रेष्ट 20-20 बैट्समैन की सुची में भी शीर्ष पर रहे.
कोहली को 2012 में भारतीय वन-डे टीम के उप-कप्तान के रूप में नियुक्त किया गया, और बहोत से समय भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अनुपस्थिति में भी वे टीम की बागडोर सँभालते है. धोनी के 2014 में टेस्ट से सन्यास लेने के बाद से ही कोहली को टेस्ट टीम की कप्तानी सौपी गयी. कोहली ने अपने नाम कई रिकार्ड्स किये जिसमे सबसे तेज़ वन-डे शतक, वन-डे क्रिकेट में सबसे तेज़ 5000 रन और सबसे तेज़ 10 वन-डे शतक बनाना भी शामिल है. वे विश्व में अकेले ऐसे बल्लेबाज़ है जिन्होंने लगातार 4 सालो तक वनडे क्रिकेट में 1000 या उस से भी ज्यादा रन बनाये है. 2015 में, वे 20-20 में 1000 रन बनाने वाले दुनिया के सबसे तेज़ बल्लेबाज़ बन गये.
कोहली को कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया. जैसे की 2012 में ICC ODI प्लेयर ऑफ़ द इयर और BCCI द्वारा 2011-12 का सर्वश्रेष्ट अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर. 2013 में, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपने अतुल्य योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार दिया गया. स्पोर्ट प्रो, एक UK मैगज़ीन, ने कोहली को 2014 में दु
जन्म – 5 नवम्बर 1988
जन्मस्थान -दिल्ली
पिता – प्रेम कोहली
माता – सरोज कोहली
विराट कोहली की जीवनी / Virat Kohli Biography In Hindi
विराट कोहली का जन्म 5 नवम्बर 1988 को दिल्ली में एक पंजाबी परिवार में हुआ था. उसके पिता प्रेम कोहली एक अपराधिक वकील और माता सरोज कोहली एक गृहिणी है. उन्हें एक बड़ा भाई विकाश और एक बड़ी बहन भावना भी है. उनके परिवार के अनुसार जब कोहली 3 साल के थे तभी उन्होंने क्रिकेट बैट हात में ली थी, और अपने पिता को बोलिंग करने कहा था.
कोहली उत्तम नगर में बड़े हुए और विशाल भारती पब्लिक स्कूल से शिक्षा ग्रहण की. 1998 में, पश्चिमी दिल्ली क्रिकेट अकादमी बनी और कोहली 9 साल की आयतु में ही उसमे शामिल हुए. कोहली के पिता ने तभी कोहली को अकादमी में शामिल किया जब उनके पडोसी ने उनसे कहा की, “विराट को गल्ली क्रिकेट में समय व्यर्थ नही करना चाहिये बल्कि उसे किसी अकादमी में व्यावसायिक रूप से क्रिकेट सीखना चाहिये.” राजीवकुमार शर्मा के हातो कोहली ने प्रशिक्षण लिया और सुमित डोगरा अकादमी में मैच भी खेला. 9 वी कक्षा में उन्हें सविएर कान्वेंट में डाला गया ताकि उन्हें क्रिकेट प्रशिक्षण में मदद मिल सके. खेलो के साथ ही कोहली पढाई में भी अच्छे थे, उनके शिक्षक उन्हें, “एक होनहार और बुद्धिमान बच्चा बताते है.”
18 दिसम्बर 2006 को ब्रेन स्ट्रोक की वजह से काफी दिनों तक आराम करने के बाद उनके पिता की मृत्यु हो गयी. अपने प्रारंभिक जीवन को याद करते हुए कोहली एक साक्षात्कार में बताते है की, “मैंने अपने जीवन में बहोत कुछ देखा. मैंने युवा दिनों में ही अपने पिता को खो दिया, जिससे पारिवारिक व्यापार भी डगमगा गया था, इस वजह से मुझे किराये की रूम में भी रहना पड़ा. ये समय मेरे और मेरे परिवार के लिए काफी मुश्किल था… आज भी उस समय को याद करते हुए मेरी आँखे नम हो जाती है.” कोहली के अनुसार, बचपन से ही क्रिकेट प्रशिक्षण में उनके पिता ने उनकी सहायता की थी. “मेरे पिता ही मेरे लिए सबसे बड़ा सहारा थे.” वही थे जो रोज़ मेरे साथ खेलते थे. आज भी कभी-कभी मुझे उनकी कमी महसुस होती है..
विराट कोहली क्रिकेट करियर / Virat Kohli Cricket Career :-
विराट कोहली एक अंतर्राष्ट्रीय भारतीय क्रिकेटर है. वे दाये-हात के बल्लेबाज है और कभी-कभी दाये-हात से बोलिंग भी कर लेते है. वे अभी टेस्ट क्रिकेट की भारतीय टीम के कप्तान और वन-डे क्रिकेट की भारतीय टीम के उप-कप्तान है. इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में वे रॉयल चैलेंजर बंगलौर के कप्तान है.
उन्होंने घरेलु क्रिकेट में विविध-उम्र की टीम में दिल्ली का प्रतिनिधित्व भी किया है. वे अंडर-19 टीम में भारत के कप्तान थे जिसने 2008 में मलेशिया के अंडर-19 विश्वकप में इतिहास रचा था. इसके कुछ महीनो बाद ही उन्होंने श्रीलंका के विरुद्ध अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुवात की थी. शुरू-शुरू में उन्हें टीम में आरक्षित खिलाडी के रूप में रखा जाता था, लेकिन जल्द ही वन-डे क्रिकेट में मध्यक्रम में उन्होंने अपने आप को साबित किया. 2011 में विश्वकप जितने वाली भारतीय टीम में से एक विराट कोहली थे. कोहली ने 2011 में वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ किंग्स्टन में अपना पहला टेस्ट मैच खेला. 2013 से ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका में अपने शतको के कारण उन्हें “वन-डे स्पेशलिस्ट” के नाम से जाना जाता है. इसी साल वे ICC की वन-डे रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर भी पहोचे. उस समय अपने करियर में वे पहली कार वन-डे बैट्समैन की लिस्ट में पहले स्थान पर पहोचे थे. बाद में उन्हें 20-20 प्रारूप में भी सफलता मिली, वे ICC की सर्वश्रेष्ट 20-20 बैट्समैन की सुची में भी शीर्ष पर रहे.
कोहली को 2012 में भारतीय वन-डे टीम के उप-कप्तान के रूप में नियुक्त किया गया, और बहोत से समय भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अनुपस्थिति में भी वे टीम की बागडोर सँभालते है. धोनी के 2014 में टेस्ट से सन्यास लेने के बाद से ही कोहली को टेस्ट टीम की कप्तानी सौपी गयी. कोहली ने अपने नाम कई रिकार्ड्स किये जिसमे सबसे तेज़ वन-डे शतक, वन-डे क्रिकेट में सबसे तेज़ 5000 रन और सबसे तेज़ 10 वन-डे शतक बनाना भी शामिल है. वे विश्व में अकेले ऐसे बल्लेबाज़ है जिन्होंने लगातार 4 सालो तक वनडे क्रिकेट में 1000 या उस से भी ज्यादा रन बनाये है. 2015 में, वे 20-20 में 1000 रन बनाने वाले दुनिया के सबसे तेज़ बल्लेबाज़ बन गये.
कोहली को कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया. जैसे की 2012 में ICC ODI प्लेयर ऑफ़ द इयर और BCCI द्वारा 2011-12 का सर्वश्रेष्ट अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर. 2013 में, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपने अतुल्य योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार दिया गया. स्पोर्ट प्रो, एक UK मैगज़ीन, ने कोहली को 2014 में दु
virat kholi suprb inning today
We have been privileged enough to witness something very special today. That innings from Kohli will be etched into the annals of cricket forever. The composure he showed in the face of crisis, never playing a shot in anger, he's just a freak. That shot off Faulkner which he powered over long-off with his wrists in the 18thover - that was the highlight. It was outrageous. Especially with the history those two share. And then for Faulkner to congratulate Kohliand help him up on his feet while the latter was overcome with the victory, sheer class. I'd better stop drooling over Kohli's batting. Also, this has turned out to be Shane Watson's final match in international cricket. And what a performance he gave today. Put everything on the line. We'll surely miss having him around. His big lunge forward, his front foot pull and .. his DRS reviews too. Anyway, the bottom line is that India are through to the semis and will be facing the West Indies on March 31. That's all we have for tonight. Just soak it all in! Goodbye!Lets glance through some of the tweets from this game:Alex Hales: This is different level!#kohliGreame Smith: Man I'm enjoying this batting @imVkohli#T20WorldCup #IndvsAus #kohliHarsha Bhogle: Kohli has had another run chase for dinner..Shane Warne: Wow, that was absolute class from Virat.Congrats India on your win. Congrats to @ShaneRWatson33 on a wonderful career, hold your head highSanath Jayasuriya: What a player he is. Well done young man. Good luck @imVkohli #WT20 #IndvsAusVVS Laxman: Take a bow @imVkohli more magnificent knock under pressure Not sure he knows the meaning of Pressure#IndvsAus #WT20Russel Arnold: He is an unbelievable Player !!! He is many cuts above the rest.. Composure was amazing ..Kohli you beauty #WT20only the Win Predictor knewSmith:"That was a serious innings from Kohli under pressure. He just hit everything out of the middle and found the gaps. Zampa could have bowled one more over. I thought the quicks bowling their slower balls into the wicket could be handy but it wasn't to be that way [explaining not bowling Zampa out]. But Virat played an unbelievable knock. I thought 160 was about par. And it took an incredible innings from Kohli to take them over the line. I thought we were in a very good position at one point - where they needed over 2 a ball. We let ourselves down in the game against NZ. We were always chasing it from there. Just weren't able to do it tonight.It's been great fun to play here at the World Cup. It's a great place toplay cricket. Wish India all the best."
jab amrica ko raas na aayi amrica hakumat
आज पूरी दुनिया में अपनी ताकत का लोहा मनवा रहा अमेरिका एक समय पहले अंग्रेजी हुकूमत तले जी रहा था, ब्रिटिश शासकों के हर हुक्म की तामील करता था. अमेरिकी अपने देश में रहता तो था लेकिन उसकी कमान ब्रिटिश शासकों के ही हाथ में थी. लेकिन कोई कब तक किसी को दबाए रख सकता है....जब दर्द की इंतहा हो जाती है तो कमजोर से कमजोर व्यक्ति के मुंह से भी आवाज निकल जाती है यह तो अमेरिका था जिसने पूरी दुनिया पर राज करने का सपना देखना तभी शुरू कर दिया था. लेकिन यह सपना तभी पूरा हो सकता था जब पहले खुद को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करवाया जाता.ऐसी मस्जिद जहां समलैंगिक भी प्रवेश कर सकें !!कहते हैं अगर आजाद होने की तमन्ना हो तो किसी भी जोखिम से डर नहींलगता और अमेरिकी नागरिकों के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. 18वीं शताब्दी तक अमेरिका ब्रिटिश ताकत के अधीन था लेकिन 16 दिसंबर 1773 को हुई एक घटना, जो बोस्टन चाय पार्टी के नाम से मशहूर है, ने अमेरिका की तकदीर पलटकर रख दी. उल्लेखनीय है कि वर्ष 1773 में ब्रिटिश संसद में एक प्रस्ताव पारित कर अमेरिकियों पर चाय के आयात पर प्रतीक के तौर पर कुछ कर लगा दिया गया. यह कर बहुत ज्यादा नहीं बल्कि सिर्फ प्रतीक के ही तौर पर लगाया गया था जिसका अर्थ यह दर्शाना था कि अमेरिका ब्रिटेन का गुलाम है. लेकिन अमेरिका को यह कतई मंजूर नहीं था कि उसके सम्मान और संप्रभुता के साथ कोई खिलवाड़ करे इसीलिए वह प्रतीकात्मक कर भी उसे बहुत भारी लगता था.इसी प्रतीकात्मक कर के विरोध मेंसंस ऑफ लिबर्टीनामक एक राजनीतिकदल के सदस्यों ने बोस्टन हार्बर पर चाय के तीन जहाजों को वापस ब्रिटेन लौटने से मना कर दिया और जहाजों में भरी चाय को चेस्टर नदी में बहा दिया. यह अमेरिकी लोगों के विरोध का तरीका था जिसके अनुसार उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि उनके लिए उनकी संप्रभुत्ता से बढ़कर और कुछ नहीं है.प्यार, राजनीति और फिर अकेलापनबोस्टन टी पार्टी के नाम से मशहूर इस घटना को चेस्टरटाउन टी पार्टी भी कहा जाता है. इस घटना के बाद अमेरिका में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ कार्यवाहियां बढ़ती गईं और अंतत: 1775 में इस घटना ने ‘अमेरिकी क्रांति’ को जन्म दिया. आज भी इस घटना को अमेरिका में होने वाले राजनैतिक विरोधों के दौरान बोस्टन टी पार्टी का हवाला दिया जाता है. इतना ही नहीं बोस्टन टी पार्टी की याद में प्रतिवर्ष अमेरिका में ‘चेस्टरटाउन टी पार्टी फेस्टिवल’ भी मनाया जाता है.कोई ‘तीसरा’ होगा प्रधानमंत्री पद का दावेदार !!नीतीश की बॉल कैच करने के लिए तैयार है कांग्रेस
Saturday, 26 March 2016
good night frnds
Good night frnds today is very happy day my traffic increase very high speed thanx to visit my blog
interesting and amazing facts of kapil sharma in hindi
इन 14 तथ्यों से साबित होता है कि कपिल शर्मा रातों रात स्टार नहीं बने
जिंदगी में हंसना बहुत ज़रूरी है, और जो लोग दूसरों को हंसाते हैं उनका कद हमेशा से ही औरों से ऊंचा रहा हैं. ऐसा ही एक नाम है 'कपिल शर्मा'. कपिल शर्मा आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। पंजाब के छोटे से शहर की मिडिल क्लास फ़ैमली का ये लड़का पूरे देश को हंसाते-हंसाते इस मुकाम पर पहुंच जाएगा, खुद उसने भी नहीं सोचा था. ऐसा नहीं है इनको ये शौहरत और नाम ऐसे ही मिल गया. इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत और कुछ कर गुज़रने का जज़्बा था. कपिल शर्मा की जिंदगी के कुछ ऐसे पहलु हम आपके सामने लाएं हैं, जिनके बारे में आपने कभी सुना नहीं होगा.
1. 2004 में कपिल शर्मा के पिता का निधन हो गया था. वो पंजाब पुलिस में हेड कांस्टेबल थे. उनके जाने के बाद कपिल शर्मा के ऊपर घर की सारी जिम्मेदारियां आ गईं. साथ ही उनकी एक बहन थी जिनकी उन्हें शादी भी करनी थी.
2. कपिल शर्मा कभी भी एक काॅमेडियन, एंकर और एक्टर नही बनना चाहते थे. हमेशा से उनका एक पैशन था सिंगर बनना.
3. कपिल मुंबई आने से पहले पीसीओ और कपड़े की मिल में काम कर चुके थे. उन्होंने अपने शहर में साॅफ्टड्रिंक्स बेचने का काम भी किया। ये सब काम उन्होंने पैसे कमाने के लिए किए थे.
4. पहले कपिल को ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ के ऑडिशन में रिजेक्ट कर दिया था। बाद में उन्हें कॉल करके बुलाया गया और उन्होंने इस शो को जीतकर खुद को साबित किया.
5. लोगों ने पहली बार उन्हें'..लाफ्टर चैलेंज'से जानना शुरू किया, लेकिन उससे पहले उन्होंने सालों तक थिएटर में काम किया और कितने सालों तक संघर्ष किया ये किसी को नहीं मालूम। लोग समझते हैं कि वो रातों-रात स्टार बन गए, यह बात सच नहीं है.
6. थिएटर के लिए उनका प्यार काफ़ी पहले से था. उन्होनें अपनी एक्टिंग और कॉमेडी को अपना करियर बनाने की ठान ली. कपिल शर्मा ने अमृतसर में थिएटर ज़्वाईन किया और बाद में दिल्ली आ गए, जहां उन्होंने कुछ शोज़ भी किए.
7. कपिल शर्मा का कहना है कि कॉमेडी एक दुर्घटना जैसी थी. लेकिन हमारे लिए तो ये दुर्घटना एक अच्छी ख़बर बन गई.
8. कपिल शर्मा को सबसे बड़ा ब्रेक मिला 'The Great Indian Laughter Challenge' शो में. 2007 में उन्होंने इस शो को जीता और उन्हें 10 लाख रुपये ईनामी राशी भी मिली.
9. कपिल जब बहन की शादी के लिए पैसे जुटा रहे थे, तभी वे संयोग से ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ जीत गए. इससे मिली 10 लाख रु. की इनामी राशि से उन्होंने धूमधाम से बहन की शादी की.
10. Comedy Circus के बाद कपिल शर्मा को अपना खुद का शो मिल गया. Comedy Nights With Kapil छोटे पर्दे का सबसे बड़ा हिट कॉमेडी शो है. इस शो में बड़े-बड़े स्टार्स अपनी फ़िल्मों को प्रमोट करने आते हैं.
11. Comedy Nights With Kapil की अपार सफ़लता के बाद कपिल शर्मा को बॉलीवुड से ऑफ़र आने लगे. उन्होंने इसे भी एक चुनौती की तरह लिया और 'किस किस को प्यार करूं' कॉमेडी मसाला फ़िल्म से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की.
12. कपिल एक बहुत Emotional Person हैं, उन्होने खुद कहा हैं वो बहुत जल्दी Weak हो जाते हैं.
13. कपिल शर्मा का पहला प्यार था सुष्मिता सेन. और आॅल टाॅइम फेवरेट एक्टर है धर्मेंद्र.
14. जिस चीज ने Kapil Sharma को इतना बड़ा बना दिया, वो था Comedy Nights With Kapil. लेकिन शायद आपको पता हो यह अब शो अब बंद हो चुका है.
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