Friday, 3 June 2016

ms dhoni career

ेंद्र सिंह धोनी, () कभी कभीएम् एस धोनीके नामसे जाने जाते हैं (जन्म 7 जुलाई 1981)झारखंडकेरांचीमें हुआ था। वो भारतीय क्रिकेटर तथा भारतीय क्रिकेट दल के वर्त्तमान कप्तान है और भारत के सबसे सफल एकदिवसीय कप्तान हैं। शुरुआत में एक असाधारण उज्जवल व आक्रामक बल्लेबाज़ के नाम पर जाने गए धोनी धीरे-धीरे भारतीय एक दिवसीयके सबसे शांतचित्त कप्तानों में से जाने जाते हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने2007 आईसीसी वर्ल्ड ट्वेंटी ट्वेंटी,2007-2008केसीबी सीरीज़ औरबॉर्डर-गावस्कर ट्राफीजिसमेभारत ने ऑस्ट्रेलिया को 2-0 में हराया प्रमुख मैच जीते। उन्होंने भारतीय टीम कोश्रीलंकाऔरन्यूजीलैंडमें पहली अतिरिक्त ओ दी आई सीरीज़ जीत दिलाई.२/९/१४ उन्होंने भारत को २४ साल बाद इंग्लैण्ड वनडेसीरीज मे जीत दिलाई। धोनी ने कई सम्मान वि प्रापत किए है जैसे 2008 में आईसीसी ओ दी आई प्लेयर ऑफ़ थे इयर अवार्ड (प्रथम भारतीय खिलाडी जिन्हें ये सम्मान मिला)राजीव गाँधी खेल रत्नापुरस्कारऔर 2009 में भारत के चौथे सर्वोच्चा नागरिक सम्मान,पद्मश्री पुरस्कार. साथ ही 2009 मेंविस्देनके सर्वप्रथम ड्रीम टेस्ट ग्यारह टीम में धोनी को कप्तान का दर्जा दिया गया। उनकी कप्तानी में भारत ने 28 साल बाद एक दिवसीय क्रिकेट वर्ल्ड कप में दुबारा जीत हासिल की। सन् २०१३ मे इनकी कप्तनी मे भारत पहली बार चैपियन ट्रॉफी का विजेता बना। ये दुनिया के पहले ऐसे कप्तान बन गये जिनके पास आईसीसी के सभी कप है। हाल मे ही इन्होंने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया। इनके इस फैसले से क्रिकेट जगत स्तब्ध रह गया। इन्होंने लगा तार दूसरी भार आईसीसी वल्ड कप २०१५ मे भारत का नेत्वत किया और पहली बार भारत ने सभी गु्प मैच जीते साथ ही इनहोंने लगा तार ११ वल्ड कप मैच जीत का रिकार्ड भी बनाया ये भारत के पहले ऐसे कप्तान बन जिन्होंने १०० वनडे मैच जीताऐ हैं। और उन्होनें कहा है की जल्द ही वो एक ऐसा कदम उठाएंगे जो किसीकप्तान ने अपने करीयर में नहीं उठाया वो टीम को २हिस्सों में बाटेंगे जो खिलाड़ी अच्छा नहीं खेलेगा उसे वो २सरी टीम में डाल देंगे और जो खिलाड़ी अच्छा खेलेगा वो उसे अपनी टीम में रख लेंगे इसमें कुछ नये खिलाड़ी भी आ सकते हैं।निजी जिंदगीमहेंद्र सिंह धोनी का जन्मझारखण्डकेरांचीमेंहुआ। उनके पिता का नाम पान सिंह व माता श्रीमती देवकी देवी[1]उनके पैतृक गाव, लावलीउत्तरखंडकेअल्मोरा जिलेके अंतर्गत लम्गार्हा ब्लाक में है। उनके माता पिताउत्तरखंडसे रांची चले आए जहां उनके पिताजी श्री पण सिंहमेकोनकंपनी के जूनियर मैनेजमेंट वर्ग में काम करने लगे। धोनी की एक बहन है जिनका नाम है जयंती और एक भाई है जिनका नाम नरेन्द्र है| पहेले धोनी के बाल लम्बे हुआ करते थे जो अब उन्होंने कटवा दी कारण वे अपने पसंदीदा अभिनेता[2]जैसे दिखना चाहते थे। धोनी[2]के[[|[2]]]के प्रशंशक है और बचपन से उनके आराध्य है उनके क्रिकेट सहयोगीसचिन तेंदुलकर[2][[|[2]]] अभिनेताअमिताभ बच्चनऔर गायिकालता मंगेशकरधोनीदी ए वि जवाहरविद्यालयमंदिर, श्यामली (वर्त्तमान में ज वि एम्, श्यामली, रांची के नाम से जाने गए) में पढ़ते थे जहां उन्होंने शुरू से हीबद्मिन्तनवफुटबॉलमें अपना हुनर प्रदर्शन किया जिस कारण वे जिला व क्लब लेवल में चुने गए। धोनी अपने फुटबॉल टीम केगोलकीपरवि रहे चुके हैं। उन्हें लोकल क्रिकेट क्लब में क्रिकेट खेलने के लिए उनके फुटबॉल कोच ने भेजा था। हालांकि उसने कभी क्रिकेट नहीं खेला था, फ़िर भी धोनी ने अपने विकेट-कीपिंग के कौशल से सबको प्रभावित किया और कमांडो क्रिकेट क्लब के (1995—1998) में नियमित विकेटकीपर बने। क्रिकेट क्लब में उनके अछे प्रदर्शन के कारण उन्हें 1997/98 सीज़न के वीनू मांकड़ ट्राफी अंडर सिक्सटीन चैंपियनशिप में चुने गए जहां उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। दसवींकक्षाके बाद ही धोनी ने क्रिकेट की ओर विशेष ध्यान दिया।खेल शैलीधोनी एक आक्रामक सीधे हाथ के बल्लेबाज और विकेटकीपर हैं। धोनी उन विकेटकीपरों में से एक है जिन्होंने जूनियर व भारत के "ए" क्रिकेट टीम से चलकर राष्ट्रीय दल में प्रतिनिधित्व किया।पार्थिव पटेल,अजय रातराऔरदिनेश कार्तिकउन्ही के दिखाए हुए रस्ते पे चले| धोनी, जो अपने दोस्तों में 'माही' के नाम से जाने जाते हैं|बिहार क्रिकेट टीम में1998/99 के दौरान अपना योगदान दिया और भारत-ए टीम के 2004 में हुएकेन्यादौरे का प्रतिनिधित्व करने के लिए चयनित हुए। त्रिदेशीय श्रृंखला में पाकिस्तान-ए टीम के खिलाफ धोनी नेगौतम गंभीरके साथ मिलकर कई सेंचुरी बनाये और उस साल के अंत में[तथ्य वांछित][14]भारतीय राष्ट्रीय टीम में चयनित हुए।चित्र:Stumping edited.jpgमहेंद्र सिंह धोनी 2008 में चेन्नई में एक मैच के दौरान एक दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज स्टंप.धोनी ज्यादातर बैकफ़ुट में खेलने के लिए और मज़बूत बॉटम हैण्ड ग्रिप होने के वजह से जाने जाते है। वे बहुत तेज़ गति खेलते है, जिसके कारण गेंद अक्सर मैदान छोड़ जाते है। उनके प्रारम्भिक मुद्रा में ज्यादा संचार नही दिखती जैसे गेंद का पीछा करना। उनके शैली में गेंद का पिच में न आना और इनसाइड एजिंग ज्यादा दिखती है।2005 में अपने पाँचवेएक दिवसीय मैचमेंपाकिस्तान के खिलाफ धोनी ने 148 रन बनाये। ये किसी भारतीय विकेट-कीपर के द्वारा बनाया गया सर्वोच्च स्कोर है। उस साल के अंत में,श्रीलंकाके खिलाफ 183* रन बनाकर उसने ना सिर्फ़ ख़ुद का बनाया रिकॉर्ड तोडा बल्कि एक दिवसीय मैचो की दूसरी पारी में बनने वाला अब तक सबसे बड़ा रिकॉर्ड भी कायम किया। सीमित ओवरों प्रारूप में धोनी की सफलता ने उनका स्थान भारतीय टेस्ट टीम में पक्का कर दिया। 2005/06 के अंत में हुए एक दिवसीय क्रिकेट में अपने अनुकूल प्रदर्शन से धोनी कोआईसीसी एक दिवसीय रेटिंग{/0{1/}}[15]में नम्बर 1 बल्लेबाज के रूप में स्थापित का दिया ।धोनी का फॉर्म गिरता रहा जब 2006 में भारत आईसीसी चैम्पियन ट्राफी, डीएलऍफ़ कप और द्विपक्षीय श्रृंखला में वेस्ट इंडीज एवं दक्षिणी अफ्रीका के खिलाफ मैच हार गया। 2007 कीशुरुआत में दक्षिणी अफ्रीका एवं वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ धोनी के फॉर्म में वापस आने की बात तब ग़लत साबित हो गई जब भारत2007 क्रिकेट वर्ल्ड कपमेंपहले ही राउंड में बाहर हो गया। धोनीएक विरन न करते हुएदोनोंही हारे हुए मैच में आउट हो गए। वर्ल्ड कप के बाद, धोनी ने द्विपक्षीय एकदिवसीय टूर्नामेंट मेंबंगलादेशकेखिलाफमैन ऑफ़ दा सीरीज़अवार्डजीता.इंग्लैंड दौरेकेलिए धोनी को एक दिवसीय टीम का उप-कप्तान[17] बनाया गया।अच्छेछे बल्लेबाज़ के रूप में धोनी ने अपनी लड़ाकू शैली को नियंत्रण करने की समझदारी दिखाई और जिम्मेदार इनिंग्स खेले। चिरपरिचित शैली को छोड़ धोनी ने दो अनोखे और असरदार क्रिकेट स्ट्रोक अपनाए। भारतीय क्रिकेट टीम में अपने प्रवेश से आज तक, धोनी की आक्रामक बल्लेबाजी की शैली, क्षेत्र पर सफलता, व्यक्तित्व और लंबे बालों ने उसे भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले क्रिकेटरों में से एक बना दिया है।घरेलू करियरजूनियर क्रिकेटधोनी को 1998/99 में बिहार अंडर-19 में शामिल किया गया था जिसमे इसने 5 मैचों (7 पारी) में 176 रन बनाये, पर क्यूंकि टीम छह के समूह में चौथे स्थान पर आई थी इसलिए क्वार्टर फाइनल तक नही आ पाई। धोनी को पूर्वी क्षेत्र अंडर-19 दस्ते (सीके नायडू ट्राफी) और बाकी भारतीया दस्ते (एमऐ चिदम्बरम ट्राफी और वीनू मनकड ट्राफी) के लिए नहीं चुना गया था। बिहार अंडर-19क्रिकेट टीम 1999—२०००कोचबिहार ट्राफीकेफाइनल में पहुँची, जहाँ धोनी नेबिहारके 357 कुल रनों के बनने में अपने 84 रनों से मदद की। तथापि पुनजब उ-19 के कुल 839 रन में युवराज सिंहने, जो की आगे चलके धोनी के राष्ट्रीय स्कुँद के सहयोगी बने,358 रून्स बनाये, जिसके सामने धोनी का स्कोर छोटा पढ़ गया। इस मैच में धोनी का देन रहा 488 रून् (9 मचेस,12 इनिंग्स),5 फिफ्तिएस,17 कत्चेस, और 7 स्तुम्पिन्ग्स. धोनी ने सी.के. नायडू ट्राफी के लिए खेले गए ईस्ट ज़ोनउ19 स्कुँद में हिस्सा लिए लेकिन वे चार माचो में केवल 97 रून्स ही बना पाए जिस कारन ईस्ट ज़ोन ने चार माचो में हार कर टूर्नामेंट में अंतिम स्थान प्राप्त किए।बिहार टीमधोनी ने अठरा साल के उम्र मेंबिहारके लिए 1999-2000 के मौसम मेंरणजी ट्राफीसे अपनी शुरुआत की। वह अपनी पहली फिल्म मैच में *असम क्रिकेटटीम के खिलाफ दूसरी पारी में 68 स्कोरिंग एक आधी सदी की।[3]धोनी 5 मैचों में 283 रन के साथ सीज़न खत्म कर दिए। धोनी ने 2000/01 के मौसम में एक हारे वजय पर बंगाल के खिलाफ अपना पहला प्रथम श्रेणी शतक प्राप्त किए। इसके आलावा 2000/01 सीज़न में धोनी और किसी मैचमें अर्धशतक से ऊपर रन नही बना पाए.और 2002/03 सीज़न में धोनीने चार रणजी मैच में कवल पञ्च अर्धशतक बनाए और दोधार ट्राफी के अर्न्तगत दो अर्धशतक बनाए, तत्पश्चात उन्हें लोअर आर्डर रन योगदान व तेज़ बल्लेबाजी के कारन पहचान मिलने लगी।2003/2004 सीज़न में असम के विपरीत रणजी के पहला एक दिवशिया ट्राफी में शतक (128*) बनाए। वेईस्ट ज़ोनस्कुँदके अर्न्तगत रहे कर उस साल का देवधर ट्राफी जीते जिसमे उन्होंने चार मैच में 244 रन बनाए। दुलीप ट्राफी फाइनल में धोनी को आन्तार्जतिक क्रिकेटरदीप दासगुप्ताके जगह पूर्व ज़ोन[4]को प्रतिनिधित्वा करने के लिए चुना गया। उन्होंने इस हारे हुए[5]मैच के द्वितिया इनिंग्स में एक अक्र्मनात्तक अर्धशतक बनाए।भारतीय टीम.2003/04 के सीज़न में उनके कड़ी प्रयास के कारनधोनी को पहचान मिली, खास कर ओ.डी.आई.मैच में उन्हें जिम्बाब्वे व कीन्या[40] यात्रा के लिए भारत ए स्कुँद में लिए गए। हरारे स्पोर्ट क्लब में जिम्बाब्वे ग्यारह के विपरीत धोनी ने 7 कैच और 4 सटमपिंग[42] कर विक्केत्कीपिंग का श्रेस्थ हुनैर दिखाए.त्रि देशीय तौनामेंट के अर्न्तगत केन्या, भारत ए, और पाकिस्तान ए ने भाग लिया जिसमे धोनी ने पाकिस्तान के 223 रन का पीछा कर अर्धशतक [44]बनाया और भारत को जीत प्रापत करने में सहायता किया। अपने प्

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